भूत

भूतप्रेत

खास तौर पर महाराष्ट्र के लोकसाहित्य में भुतों की कहानियों को बहुत महत्व हैं l नई-पुरानी परुकथाओं में भूतों की कल्पना होती ही हैं l वेद और पुराणों के साहित्य में भुतों की बात कई जगह होती हैं l दरूड पुराण में भुतों के बारे में कई बाते आती हैं l भुतों के अस्तित्व का सबूत हमेशा सुना सुनाया होता है फिर भी भुतों के अस्तित्व का यकीन इतिहास काल से आज तक सर्वत्र दिखाई पडता हैं l

भुत याने किसी जानवर या आदमी को अभौतिक मूर्त-रूप होता हैं l कभी-कभी उसे आत्मा भई कहाँ जाता हैं l जिस आदमी की दुर्घटना में मौत हो जाती है, जिनकी इच्छाएँ अतृप्त रह जाती हैं, आशा-आकाक्षाएँ पूरी नहीं होती वह आदमी भूत बनकर पृथ्वी पर रहता हैं l कई बार मृत आदमी के आभासवाली आकृति को भी भूत कहा जाता हैं l  यह आकार कभी कभार मेघ जैसा तो कभई हुबहू मृत व्यक्ति के जैसा दिखाई देता हैं l भुतों के कई प्रकार माने गये हैं l स्त्री के भूत को डायन कहते हैं तो अनब्याहे युवक के भूत को ‘मुजां’ कहते हैं l

भूत याने अतृप्त आत्मा – अतृप्त आत्मा को भूत मानना हिंदुओं के जीवात्मवाद में ही इसका मूल होगा।  इसके अनुसार सभी सजीव और निर्जीव वस्तुओं में आत्मा होता है – ऐसा माना जाता है।  आदमी के भीतर की आत्मा (छोटा आदमी) ही उसको जिंदा रखती है, उसकी हलचले उसी के कारण होती हैं l आत्मा याने उस आदमी की हुबहू प्रतिकृती होती हैं l हुबहू याने कपडेलत्ते भी बिलकुल एक जैसे होते हैं ऐसा लोग मानते हैं l आदमी को दिखनेवाले भुतों की आकृतियाँ उसकी समझ गलत फहमियाँ, उसकी खुद की धारणा और पूर्वग्रह पर टिकी हुई होती हैं l

भुतों के बारे में कल्पना – लोककथाओं में भुतों को अक्सर रास्ते में स्थित एंकात जगह, देहातों के मैदान, निर्मनुष्य मकान, कुंए आदि जगहों के साथ-साथ दहनभूमि, शमशान, कबरिस्तान, बड-पिपल, जैसे पेड ऐसी जगहों पर पाये जाते हैं l उनके पाँव उलटे होते हैं l उन्हें सिर नहीं होता और उनकी आँखे छाती पर होती हैं l उनकी छाया नहीं पडती और उनका प्रतिबिंब भी किसी को दिखाई नहीं देता।  बंद कमरे में भी वे घूम सकते हैं l आजूबाजू में यदि वे उपस्थित हों तो जोर जोर से हवा बहने लगती है और हवा एकदम ठंढी हो जाती हैं l भूत सभी को नहीं दिखाई देते, कुछ लोगों को ही दिखते हैं l संशयी लोगों को तो बिलकुल नहीं दिखाई देते।  लोककथाओं में भुतों को हमेशा दुष्ट चित्रित किया जाता हैं l आधुनिक इपन्यासों में और फिल्मों में उपकार करनेवाले भूत दिखाये जाते हैं l

युक्तिवाद  –  इन्सान की ज्ञानसंबंधी मर्यादाएँ –

हम दो प्रकार के भुतों की कल्पना कर सकते हैं l एक तो कल्पित भूत और दूसरा मानसिक रूग्ण को आभास होने वाला भूत मन में गहराई से जो कल्पनाएँ जमा हो जाती हैं उनके प्रभाव से उन्हें आभासात्मक भूत दीखते हैं l प्रत्यक्ष भूत देखने के बारें में विद्वान कहते हैं कि मनुष्य के ज्ञान की मर्यादाएँऔर अन्य भौतिक कारणों से उनके दावे का स्पष्टीकरण किया जा सकता हैं l हना के दबाव के कारण होनेवाले परिवर्तन से घर के दरवाजे गिर सकते हैं l बाहर दौडनेवाली कारों का उजाला खिडकी के जरिए दीख सकता है ऐसे समय भी किसी न किसी आकार को देखना आदमी की स्वाभाविक प्रवृत्ति होती हैं l इस कारण भी भुतों कों देखने का आभास हो सकता हैं l आदमी की परिधीय दृष्टी (पेरिफेरल व्हिजन) भी भूत दिखने की कारम होता हैं l

ऐसी नजर काफी संवेदनशील हो सकती है और खासकर रात के वक्त हमारा मस्तिक जब बहुत थका।  हुआ होता है तब आवाज और दृश्य नका सहजही गलत अर्थ लगाया जाता हैं l कोई स्थान भूतों की बस्ती का है ऐसी हमारी दृढ धारणा बन जाती है और वहाँपर घटनेवाली रोजमर्रा की घटनाऐं भी हमें भुतों के कारण घटती है – ऐसा ही महसूस होता हैंl

अलग-अलग ध्वनियाँ भी भूत दीखने का आभास होने के लिए कारणीभूत होती हैंl कार्बन मोनॉक्साइड की वजह से अपनी आँखों और कानों की संवेदना बिघड सकती है और भुतों का आभास हो सकता हैंl इसे हॅल्युसिनेशन कहते हैंl भूचुंबकीय (जिओमॅग्नेटिक) बदलों के कारण कुंभखंड (टेम्पोरल लोब्ज) याने मस्तिष्क का एक हिस्सा उत्तेजित होकर भुतों का आभास होता हैंl

भुतों के अस्तित्व पर विश्वास रखनेसे होनेवाले नुकसान – ऐसे विश्वास के कारण आदमी विचित्र विचार और विचित्र बर्ताव करता हैंl फालतू विचार मन में घर करने से तनाव औप डर की स्थिति पैदा हो जाती हैं l जहाँ पर भूत हैं ऐसा हम समझतें हैं उस स्थान के बारें में अनेक अफवाएँ फैलती है और डर के कारण वो स्थान निर्मनुष्य याने सूनसान बन जाता हैं l फिर वह पूजाअर्चा का स्थान बनता है और इसीसे भानामती जैसे घटनाएँ घटने लगती हैं l इसके पीछे कोई लडकी होती है जिसे सहारा चाहिए।  परिवार के अन्य सदस्यों के द्वारे पूछताछ हो ऐसी उसकी इच्छा होती है।

भूत को निकालना यह एक धार्मिक और आध्यात्मिक श्रध्दा की बात होती हैं l  जादूटोने का विधि भी इसमें होता हैं l किसी स्थान का भूत हटाके वह स्थान फिरसे निर्दोष बनाने के दावे हमेशा झूठे साबित हूए हैं l अत:  जो भूत होते ही नहीं उन्हें मिटाना केवल असंभव हैं l

इसके विरोध में अंनिस की उपाय योजना – अंनिस ने भुतों का अस्तित्व है ही नही ऐसा दावा करनेवालों को चुनौती दी हैं l जो कोई भूत है यह बात वैज्ञानिक कसौटी पर सिध्द कर दिखाएगा उसके लिए बड़े बड़े इनाम भी जाहीर किये हैं l भुतों का भय लोगों के मन से मुट जाना चाहिए।  भुतों के संदर्भ में अफवाएँ ज्यादा होती हैं l ऐसे स्थानों पर जाकर जन जागृति करने का कार्यक्रम अंनिस के द्वारा निरंतर जारी रहता हैं l ‘भूत’ इस संकल्पना को लेकर उनका वैज्ञानिक विश्लेषण करनेवाला भरपूर साहित्य अंनिस ने प्रकाशित किया हैं l