चमत्कार

चमत्कार के पीछे विद्यान-

चमत्कार जैसी कोई बात नहीं होती और कोई भी व्यक्ति चमत्कार नही कर सकता ऐसा विश्वास अंनिस को हैI संसार में घटनेवाली सभी घटनाएँ प्रकृति के नियमों के अनुसारही घट सकती हैI अज्ञान और दुराग्रह के लोग चमत्कार का दावा करते हैंI हमें अलौकिक शक्ति प्राप्त है और हम चमत्कार कर सकते हैं ऐसा दावा करनेवालों को अंनिस आव्हान करती हैI जो कोई वैज्ञानिक प्रयोगों की शर्ते मानकर दोनों की संमतीसे आयोजित जानकारों की समिति के सामने नीचे दी हुई लिस्ट के प्रयोग करके अपनी अलौकिक शक्ति को सिद्ध करके बतायेगा – उसे 21 लाख रुपयो का पारितोषिक दिया जाएगाI

कसौटी के प्रयोग इस प्रकार है

  1. दी हुई नोटों की ज्योंकी त्यों प्रतिकृति तैयार करना
  2. शरीर को बिलकुल भी ना हिलाते हुए जलते हुए कोयलों पर खडे रहना और शरीर को तकलीफ न होने देना
  3. हवा में हाथ फैलाकर पहले तय हुई बात के अनुसार एखाद वस्तू निकालना (पृ. 77)
  4. लिफाफे में बंद नोट पर लिखा नंबर पहचानना
  5. किली विशिष्ट क्षण में परिचित ज्ञान के सहारे या आध्यात्मिक शक्ति से दुसरे के मन में जो विचार चल रहे हैं उन्हें पहचानना
  6. काटे हुए अवयवों में प्रार्थना, मंत्रोच्चर, बभूत या तीर्थ से 2 सें मी. तक की वृद्धि हुई है ऐसे दिखाना
  7. किसी भी यंत्र अथवा साधन का इस्तेमाल किए बिना केवल योगविद्या से हवा में तैरना
  8. योगसाधना से पानी पर चलके दिखाना
  9. योग शक्ति से हृदय का धड़कना कम से कम पांच मिनट तक रोके रहना
  10. निकट भविष्य जो घटनाएँ घटित होगी उनमें से 80% घटनाओं का कथन करना
  11. एखाद भूत की तसवीर खींचना
  12. बाहर से ताला लगाकर बंद किये हुए कमरे से बाहर आना
  13. अलौकिक शक्ति के बलपर किसी वस्तू का वजन या ाकार कम – ज्यादा करके दिखलाना
  14. छिपा कर रखी हुई चीजें खोज देना
  15. पानी को पेट्रोल में रूपांतरित करना
  16. कम से कम दस हाथों के प्रिंट या पत्रिका देखकर संबंधित व्यक्ति जिंदा है या मर गया, स्त्री है या पुरुष यह पहचानना
  17. बार बार होनेवाली बिमारियाँ अलौकिक शक्ति के सहारे ठीक करना
  18. मंत्रसिद्ध स्फटिक रत्न या खडों का इस्तेमाल करके जो चाहिए वह बातें घटित करना

प्रयोग की शर्तें

  1. यह आव्हान स्विकारनेवाले आदमी को 10000 रु (200 डॉलर्स) समिति के पास अनामत के तौर पर जमा करने पडते हैंI चुनौती के अनुसार चमत्कार करके दिखाने में सफलता नहीं मिली तो अनामत को वापस नहीं किया जाएगा.
  2. वैज्ञानिक दृष्टि से कसौटी को परिपूर्ण करने के लिए उपरोक्त जिस चमत्कार की चुनौती को स्वीकारा गया है उसके अनुसार संपूर्ण व्यवस्था समिति के द्वारा की जाएगी.
  3. चुनौती को स्वीकारनेवाले आदमी का सुरक्षा का भी ध्यान रखा जाना चाहिए

चमत्कार करते समय प्रथम असफल रहा तो चुनौती स्वीकारनेवाले को और एक मौका दिया जाएगा और 15 दिन के भीतर ही दुसरी कसौटी ली जाएगीI

बाबा बुवाओं का पोल खोलना

भोली भाली जनता को लुटनेवाले ढोंगी  बाबाओं को अंनिस की चुनौती हैI अंनिस सबकी विवेकशक्ति को चुनौती देती हैI अंनिस को किसीके निर्गुण, निराकार, सर्वशक्तिमान परमात्मा और उसकी निःस्वार्थ भक्ति के संदर्भ में कोई वास्ता नहीI मगर जो ईश्वर फालतू लोगों की धमकियों का शिकार बनता है और जडजवाहर, पैसे या नारियल के जैसी छोटी बडी रिश्वत लेता है, कुछ अन्य बोतें से प्रसन्न होता है और पल देता हैऐसे ईश्वर की ओर स्वयं को देवदूत माननेवालों का अंनिस की ओर से कड़ा विरोध होता हैI

ऐसे देवदूतों को चुनौती देते समय अंनिस के कार्यकर्ता गण निम्नलिखित बातों को अमल में लाते हैंI

  1. जो रूढियाँ नष्ट हो चुकी है उन्हें छोडकर नई बातों को अपनाने हेतु अंनिस को लोगों के साथ नरमी से पेश आना चाहिए|
  2. साधारण जनता विवेक या बुद्धि की अपेक्षा भावनाओं से शीघ्र प्रभावित होती हैI अतः उनके विवेक को जगाना बहुत जरूरी है और महत्वपूर्ण हैI
  3. केवल कानून बना लेने से कुछ भी हासिल नहीं होता यह बात सभी जानते हैं फिर भी अंधश्रद्धाओं और अंधविश्वासों पर रोक लगाना आवश्यक है और कुछ कानूनों ने यह करके बतलाया है.
  4. सभी दुष्ट प्रथाओं की गहराई से छानबीन करके उसमें स्थित क्रूरता लोगों के सामने पोश करते हुए फौरन उन्हें बंद कर देना चाहिएI

इसके विरोध में अंनिस की कार्यवाही 

अंधश्रद्धाओं के कारण बाबा लोगों का रास्ता खुला हो जाता हैI उनकी पोल खोलने के लिए और अंधश्रद्धाओं को खत्म करने के लिए अंनिस के द्वारा शैक्षिक संस्थाएँ मीडीया, राजनीतिज्ञों को सहायता देने का आव्हान किया जाता हैI विज्ञान और तंत्रज्ञान की प्रगति के कारण वास्तव में ईश्वर और धर्म का मानवी मनों पर जो प्रभाव है वह कम होना चाहिएI पर जो हो रहा है वह बिलकुल विरुद्ध हो रहा हैI सामाजिक समस्याएँ उभारनेवाले बाबा लोगों को रोकने की जिम्मेदारी हरेक नागरिक को उठानी चाहिएI प्रत्यक्ष में धर्म के नामपर जो नरसंहार चालू रहता है  तब उसे खादपानी डालनेवाली  अंधश्रद्धाओं और लोगों की श्रद्धा का इस्तेमाल करते हैंI सत्यसाईबाबा और आसाराम बापू जैसे लोग अंधश्रद्धाएँ फैलाते हैं और उन्हें लोगों के मन में दृढ़ करते हैंI अपने मन पर सालों से  ये अंधविश्वास और रूढ़ियाँ छा गयी हैI इसी कारण हम कॉम्प्युटर की भी पूजा करते हैI उपग्रह को लॉँच करने के पहले उसा गंधाक्षत, फूल चढाते हैंI अगरबत्ती कपूर सुलगाते हैं और उसके सामने नारियल भी फोड़ते हैंI हमारे राष्ट्राध्यक्ष सत्यसाईबाबा के जन्म दिवस के अवसरपर वहाँ गये तो इसमें आश्चर्य कैसा? इस वक्त राष्ट्रपति ज्यादा और वैज्ञानिक कम रहेंI अलावा इसके भारत भूमि के राष्ट्रपति के पद पर बिठाया उन राजनीतिज्ञों को धन्यवाद देना चाहिएI

हम केवल मात्र  अंधश्रद्धाओंका उन्मूलन करें इतना सीमित दृष्टिकोण हमारा नही हैंI हमें समाज में नैतिक परिवर्तन लाना हैI अब तो अवश्यकता है – दुनिया के पुनरुज्जीवन की। अंनिस उपलब्धि प्रशंसा योग्य हैI अभी बहुत कुछ करना बाकी है इसके लिए हमें भारत के कोने कोने तक पहुँचना होगाI