होली महोत्सव

होली–

कोई भी क्रांति सफल होने के लिए लोगों का सहयोग होना जरूरी होता हैI मार्च महिने में महाराष्ट्र में होली के पर्व पर जो अनिष्ट प्रथाएँ जारी है उन्हें दूर करते वक्त अंनिस को ऐसा अनुभव आयाI पहले होली के दिन मित्रगण, रिश्तेदार सभी एक साथ मिलकर आनंद के साथ त्योहार मनाते थेI धीरे धीरे यह सब बदलने लगा और अब तो दूसरे गुटों में तनाव बढ़ने लगे, झगडे होने लगेI बड़ी बड़ी लकडियाँ, चुराकर लाया हुआ लकड़ी का सामान, और भोग में चढ़ाए जानेवाले पदार्थ जलकर भस्म होने लगेI इतने से समाधान नही हुआ ते एक दूसरे को और खासकर महिलाओं को गंदी गालियाँ देने की प्रथा प्रारंभ हुईI यह घिनौनापन रोकने के लिए प्रदूषण, लकड़ियाँ, और अनाज़ आदि का फालतू खर्च रोकने के लिए अंनिस ने कोशिश शुरु कीI परंपरा के अनुसार शाम के समय होली जलायी जाती हैI उसमें बड़े पैमाने पर लकड़ियाँ डाली जाती हैI भोग के लिए खास मिठाई पुरनपोली बनाई जाती है और अग्नी को अर्पण की जाती हैI

यह सारा फालतू खर्च और भौंडापन हटाकर समाज में एकता निर्माण करने का आदर्श रूप होली को देने का अंनिस ने तय कियाI लोगों ने अपने अपने नुक्कड़ पर होली को छोटा रूप दें अनाज भस्म न करेंI  और स्त्रियों का मनोबल ऊँचा उठे ऐसे नारे लगाये जाय  यही आग्रह होता है अंनिस का! अपने आसपास के इलाके की साफसफाई और स्त्री पुरुष समानता इन समस्याओं के बारे में लोगों के भीतर जागृति पैदा करें और समस्याओं को मिटाने के लिए लोग काम करें यही उद्देश्य होना चाहिए.

पर्व मनाने का यह नया तरीका सबसे पहले कोल्हापूर की अंनिस की शाखा ने प्रथम कदम उठायाI होली के कई दिन पहले से ही उन्हों ने तैयारी शुरु कीI समविचारी संस्थाओं के साथ और स्कूलों के अध्यापकों के साथ संपर्क प्रस्थापित किया गयाI अध्यापकों ने अपनी व्यस्त्तता के बीच समय निकालकर विद्यार्थियों को होली नये ढंग से कैसी मनानी चाहिए इसकी जानकारी दी और इस त्योहार का समाज को बदलने हेतु कैसे उपयोग किया जा सकता है यह बात भी बताईI पर्यावरण का रक्षण और इलाके की साफसफाई करने का संदेश लोगों तक पहुँचाने हेतु  मोर्चे निकाले गयेI स्थनिक नेतागण समाचार पत्र और अन्य संस्थाओं ने अच्छा सहयोग दियाI इसी कारण होली के दिन खडे होने के बजाय वे लोग घर घर में होली के आग में जो पुरणपोलियाँ डाली जाती है उन्हे इकठ्ठा कर गहे थेI ऐसी 10000 पुरणपोलियाँ आग में जल जाने के स्थान पर गरीब लोगों को इन लडकों ने बांट दीI

महाराष्ट्र की अंनिस संस्था का केंद्र एक ही जगह पर होता है ऐसी बात नहींI हर शाखा अपने अपने कार्यक्रम का आयोजन कर सकती हैI  कार्यक्रमो का उद्देश्य एक होता है फिर भी उनमे विविधता और नवीनता होती हैI कोल्हाकूर के एक उपनगर में स्थानीय कार्यक्रताओं ने लोगों ले पुरनपोली के बजाय गोबरियाँ िकठ्ठी की जिससे होली की आग काफी देर तक जलती रहीI 14 ट्रक बर के गोबरियाँ मिलीI ये सारी नगरपालिका को सौपी गईI अन्य एक शाखा ने लकड़ियों के स्थान पर कचरा इकठ्ठा किया और उसकी होली जलायीI

महाराष्ट्र के 20 जिलों में 60 – 70 जगहों पर होली का त्योहार अच्छे ढंग से संपन्न हुआI कहीं तंबाखू के बनी चीजों की होली जलायी गई और ये सेहत के लिए कितना हानिकारक है यह संदेश दिया तो कहीं पर सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता मुहिम यशस्वी रहीI मिडियावालों ने भी अंनिस के कार्यक्रम की प्रशंसा की और प्रसारण कियाI इस परिवर्तन का लोगों ने भी खुली दिल से स्वागत किया.

महाराष्ट्र अंनिस और होली उत्सव

यह शीर्षक पढनेवालोको थोडा अटपटा लगेगाI  अंधश्रद्धा का उन्मूलन करनेवाली अंनिस का होली के साथ क्या संबंध हो सकता है I मगर सच बात तो यह है कि त्योहार मनाने से समाजहित की कुछ बाते बन सकती हैI एक  तो  त्योहार मनानेसे लोगोंके मन उत्साहित होते हैंI लोग एक दूसरेके निकट आते हैंI आये दिन मनोरंजन के कई साधन मिडिया से और बझार से उपलब्ध हो जाते हैंI मगर त्योहार मनाने का आनंद कुछ और ही होता हैI यह आनंद अन्यत्र नही मिल पाताI त्योहारोंको टाला भी नहीं जाताI संसारभर में लोग निरंतर कोई ना कोई त्योहार मनातेही रहते हैंI भारत इसके लिये अपवाद नहींI अलावा इसके भारत में तो कई धर्म, जातियाँ उनके भगवान, उनकी अलग अलग संस्कृतियाँ रीतीरिवीज, संत महात्मा, उनके जन्म दिन और निर्वाण दिन, बगवान के जन्म दिन आदि इतनी सारी विविधता है की हररोज किसी न किसी सामाजिक संघटन का महत्वपूर्ण त्योहार मनाया जाता हैI उसमें देश की ऐतिहासिक और राजनीतिक महापुरुषोंका जयंति और पुण्यतिथियों को भी मनाया जाता हैI होली का पर्व प्रादेशिक या छोटे स्तर का पर्व नहीं हैI दक्षिण भारत का कुछ हिस्सा छोड दें तो संपूर्ण भारत वर्ष में यह त्योहार बहुत उत्साह के साथ मनाया जाता हैI गरीब लोग भी यह एक दिन हर्षोल्लास के साथ मनाते हैंI इनके लिये नामुमकीन आनंद को इस दिन पाते हैं.

अंनिस इस त्योहार के पंदे में इसलिये पडा कि यह त्योहार मनाने की रीति बहु त असभ्य हैI कुछ प्रथाएँ बुरे परिणाम करती हैंI जंगलो में जाकर वहाँ पेडों को काट कर लकडियां इकट्ठी करना और उनकी होली जलानाI होली के ज्वालामें पुरणपोली जैसे पदार्थ भी भस्म कर दिये जाते हैI

अनाज की यूँ बरबादी करना और महिलाओंके लिए अभद्र गीत, विनोद और गालियाँ बकना और इसके जरिए हम कौन से स्तर तक पहुँचे  है इसका प्रदर्शन करनाI इस तरह यह उत्सव मनाते हैi एक जमानाथा जब जॆगल काटकर मनुष्य को रहने के लिये जमीन खाली कर देने की आवश्यकता हुआ करती थीi तब इस त्योहार को मनाना उचित माना जाता थाi मगर अब जंगल और वहाँ के पेडोंको बचाने की बहुत आवश्यकता महसूस हो रही हैi आजकल अनाज के अकाल के बारे में कुछ ना बोले तो ही अच्छाi होली के त्योहार का मूल अर्थ नष्ट हो गया है और निरर्थक रुढियाँ तथा कर्म कांड ही बचे हैंi इस त्योहार पर शराब पीना, गंदी भाषा में मां बहनों को गालियाँ देना और समाज के लिये हानीकर प्रथाओंसे दूसरे दिन याने धूलवड को शोर मचाना भी शुरु हो चुका हैi

ये सारी प्रथाएँ याने गुनाह हैi पर्यावरण को ठीक बनाये रखनेवाली लकडी और गरीबों मुष्किल से मिलनेवाला अनाज इनकी हिफाजत न करना गुनह समझना चाहिएi ढोल नगारे बजाकर और जोर जोर से चिल्लाकर बीमार और बूढे लोगों का जीना हराम कर देनेवाला  ध्वनिप्रदूषण फैलाना भी गुनाह होता हैi महिलाओं के नाम से गंदी गालियां देकर पुरुषत्व को साबीत करना भी महान अपराध होता हैi

इन सब अपराधों पर पाबंदी लगाकर बढिया ढंग से उच्च अभिरुचि को बढानेवाली, समाजोपयोगी प्रथाएँ होली के उत्सव में शुरु करने की आवश्यकता अंनिस कार्यकर्ताओंको महसूस हुईI इसलिये अंनिस ने नये ढंग से होली पर्व मनाना तय कियाi कोल्हापूर और सांगली का अंनिस की शाखाओं ने अगुवाई कीi उनकी मुहीम में स्कूलों का सहयोग पाने के लिये उन्होंने हेडमास्तरों से मिलकर अनुरोध कियाI ऐसीही बिनती उन्होंने समविचारी संगटनोंसे भी कीIस्थानिक पंचायत, नगरपालिका और सामाजिक कार्य करनेवाली संस्थाओं की भी उन्होंने अपना मुहीम में शरीक होने के लिये निमंत्रण दियेI सभी ने उत्साह के साथ इस कार्यक्रम में सहभागी होने का आश्वासन दियाI शिक्षणाधिकारी  ने स्थानिक प्राथमिक और उच्च माध्यमिक स्कूलों के हेडमास्तरोंको इस संदर्भ में सूचनाएँ दीI अंनिस ने अपने कार्यों की रूपरेषा बनायीI उसमें सभी कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारीयां तय कीI

रूपरेखा में तय बातों के अनुसार शिक्षकों और छात्रों ने मिलकर होली से पंद्रह दिन पूर्व एक मोर्चा निकालाI उनके हाथ में पर्यावरण रक्षम, सामाजिक जिम्मेदारियां परिसर की सफाई का महत्व आदी के बारे में घोषणा लिखे हुए फलक थेI इससे लोग अपनी अनिष्ट रूढियां और गैर जिम्मेदार बर्ताव के बारे में सजग हो गयेI कृतिसमिति ने लोगों से कहा कि हर आदमी पांच गोबरियाँ होली में डालने का स्थान पर अंनिस को दें और भोग लगाने की पुरणपोली भी दें ऐसा अनुरोध कियाI इस बहाने मिले हुए अनाज का कण भी बेकार नहीं गयाI तुरंत जरूरतमंद लोगों में बाट दिया गयाI इसके लिये झोपडियों में रहनेवाले लोगों से मिलकर अनाज बाटने के लिये संमति ली गई थीI नगरपालिका ने अंनिस के द्वारा इकट्ठी की गयी गोबरियां अंत्येष्टी संस्कार के लिए इस्तेमाल करने की बात मान लीI महिला संगटनों ने नारीयों को हसी मजाक का लक्ष्य न बनाया जाय ऐसा इशारा दे रख्खाI इन सभी कार्यक्रमों की वजह से मुहीम बहुत प्रभावी बन गयीI लोग अपनी रूढीयों के बारे में चर्चा करने लगेI रूढीयो को बदलने के लिये पूछताछ करने लगेI

होली के दिन कार्यक्रताओं ने अलग स्थानों पर  लोगों से मिला हुआ अनाज और गोबरी इकठ्ठा करने का इंतजाम किया थाI नगर के मेयर ने स्वयं आकर हमें पुरणपोली दीI दस हजार पुरणपोलीयाँ हमने लोगों को बाटीI दो ट्रक गोबरियाँ स्मशानभूमी में पहुंचानेका प्रबंध नगरपालिका ने किया।

कुछ स्थानों पर कार्यकर्ताओं ने कचरा और फेका हुआ अनाज इकठ्ठा करके लोगों से कहा कि यही सबकुछ होली में जला दीजियेI इस कार्य में छोटे बच्चों से लेकर बडे बूढों तक सभीने हिस्सा लिया और देखते ही देखते सारा इलाका साफ सुथरा हो गयाI

गुटखा खाने की लत लोगों मे बढ गयी थीI एक कार्यक्रम था जिसमें लोगोंने अपने पास जितनी भी गुटखा पुडियाँ थी वे सब कार्यकर्ताओं की बिनती के कारण होली में जला दीI स्थानिक मिडियावालोंने भी उनके कार्यक्रम को खूब प्रसिद्धी दी.

श्रद्धालुओं का भावनाओंको बिना ठेच पहुंचाते हुए त्योहार मनाते समय खर्च, पूंजी, अनाज का अपव्यय, प्रदूषण, महिलाओं का अपमान ये सब बातें कैसे रोकें इसकी जानकारी अंनिस कार्यकर्ताओं ने इस कार्यक्रम के जरिये लोगोंके सामने रखीI प्रदूषण और नाश को टालकर लोग त्योहारों को मनाकर आनंद प्राप्ती कैसे कर सकते हैं यह बात बहुतही व्यवस्थित ढंग से अंनिस ने लोगों को बता दी थीI

के. डी खुर्द