जादूटोना

प्राचीन काल से जादूटोना संसारभर में प्रचलीत है l वेदों में और खास तौर पर यजुर्वेद में जादूटोने के वर्णन मिलते है l जादूटोने में अलौकिक शक्तीका अस्तित्व मानना भी एक अंधश्रध्दा ही है l उसमें तांत्रिक कर्मकांड होते है l भूतबाधा अथवा जादूटोने का असर जिस पर हूआ है ऐसे व्यक्तिपर का असर नष्ट करने के लिए इस कर्मकांड का इस्तेमाल करते है l कुछ तांत्रिको के शरीर में अलौकिक शक्ति होती है जिसके कारण कुछ लोगों का बर्ताव नियंत्रित कर सकते हैं ऐसी समझ है l मगर इनकों भूतों का और अस्तित्व भी महाराष्ट्र में भूतों की और आत्माओं की अलग-अलग जातियां मानी जाती है l अलग-अलग नाम भी दि। हुए है l लोभी ब्राम्हण मर गया तो उसका ब्रम्हसंबंध होता है, जचकी के वक्त स्त्री मर जाये तो वह डायन बन जाती है, कर्णपिशाच्च आँखो से नहीं दिखाई पर कानें से सुनाई देते हैं, पिशाचों का चीजें जगहपर से हीलाना आता है, वे आग लगा सकते है, कपडे फाड सकते हैं, कपडों पर या दीवारों पर गंदे चिन्ह बना सकते हैं, पके हुए अनाज को बर्बाद कर सकते है l ऐसी बाते केवल मात्र अदृश्य शक्ती ही कर सकती है और जादूटोना जानेवाले लोग ही ऐसी तकलीफ देनेवाले पिशाचों से हमें छुडा सकते हैं – ऐसी गलतफहमियाँ लोगों में फैली हुई है l अपने आपको मांत्रिक समझनेवाले लोग खुदको ज्ञानी समझकर भूतों की मेहमाननवाजी कैसे करनी चाहिए यह बात तुम्हें सिखाने के लिए तैयार रहते है l भूतों को और आत्माओं को उनके भटकने से और जिन लोगों को इनकी तकलीफ होती है उनको इस पीडा से वे मुक्ति दिलाते हैं ऐसा वे दावे के साथ कहतें है l

जादूटोना और मोहिनी विद्या

जादूटोना और मोहिनी विद्या का भारत देश में बिछा जाल —–

जादूटोना और मोहिनी विद्या की समस्या को सत्य साईबाबा जैसे लोग और अधिक पेचीदा बना रहे हैं। सत्य साईबाबाके मतानुसार जादूटोना सामने घटनेवाली सत्य घटना है। साईबाबा और उनके उपदेशों का भारत के प्रधानमंत्री राष्ट्रपती, सर्वोच्च न्यायालय के न्याधीश भी आदर करते हैं। ऐसी स्थिती में इस देश की प्रचंड अशिक्षित जनता का और सुशिक्षितों का अज्ञान कैसे दूर करें? अपनी जाहीर सभाओं में सत्य साईबाबा बोलते हैं –संसार में जादू तो है ही;दोनो प्रकारकी – शुभ (हितकारक) और काली (अहितकारक)। मगर दैवी शक्ति के अनुसंधान को जादू न समझें। कौऐ का अंडा और कोयल का अंड़ा एक ही प्रकार का माना जा सकता है क्या? (सत्य साईबाबा व्हाल्यूम ३) इससे पता चलता है कि सत्यसाईबाबा धोकादायक अंधश्रध्दाओं का कैसे समर्थन करते हैं। इन निराधार श्रध्दाओं के कारण भोलीभाली महिलाओं का खून जैसी घटनाएँ घटती है। बाबा का प्रभाव गरीब और अमीर सभी लोगों पर जबरदस्त है।  उनकी बातों से बुरी नज़र, जादूटोना, भूतबाधा आदि जैसी गलत धारणाओं को पंरपरानिष्ठ लोग व्यवहार में लातें हैं। सत्यसाईबाबा के द्वारा ज्योतिष शास्त्र की ऐसी ही एक संकल्पना याने कि शगुन-अपशगुन (राहूकाल और गुणिकाल) को समर्थन दिया है जिससे लोग उसपर भरोसा करके उसका पालन अपनी रोज़र्मरा की जिंदगी में करते हैं। बाबा जैसा स्वयंघोषित भगवान जो कुछ भी बोलेगा वह उनके शिष्यों के लिए ब्रह्मवाक्य होता था।

अपने भक्तों से वे कहते हैं – आप लोगोंपर जादूगरों ने हमला किया था मगर मैंने उन्हें रोका और आप लोगों की रक्षा की। और भी कुछ उदाहरण पढ़ीए —

साईबाबा के ‘द मॅन ऑफ लिरॅकल्सी’ इस संतचरित्र में हॉवर्ड मर्फेट न बहुत आत्मीयता से एक किस्सा लिखा है।  अल्फ टाईडमन जोहेन्सेन नामक नॉर्वेजियन आदमी पर सन १९६२ में किसीने भयानक जादू किया था। सत्यसाईबाबा ने उसको उस जादू से छुटकारा दिलाया। यह आदमी मुबंई के एक बड़े जहाज कंपनी का मालिक था। उसके दुश्मनों ने उसपर जादूटोना करने के लिए किसी जादूगर को कहा। (पृ. १६५) किंतु आल्फ की कंपनी की समस्याएँ छुडानेवाले वकील को इस बात का पत्ता चला। इस प्रकार की कुछ और घटनाओं के बारें में उसे मालूमात थी। फिर अल्फ किसी पारसी पुरोहित के पासगया। उसके द्वारा मर्फेट उस संतचरित्र के लेखक से कहा कि उसने कई विचित्र तरीकों से अपनी नौका जादूगर ने बनाये पानी के बवंडर में से खेकर जादूगर को ढूंढ निकाला वह एक बूढ़ा भारतीय था और उसने गलत तरीके से अल्फ के पर्सनल ऑफिस में प्रवेश किया था। अल्फ ने उसे गिरफ्तार किया। फिर उस जादूगर ने पहले से भी ज्यादा पैसे लेकर अल्फ के लिए काम करना कबूल किया। अल्फ के सभी दुश्मनों को नष्ट करने का वचन भी दिया। तब उसने कहा कि जादूगर लोग पहुत खतरनाक होते हैं। माँ के पेट में स्थित बच्चे को भी वे मार डालते हैं। उसी दिन सुबह अल्फ को नॉर्वे से क टेलिग्राम मिला था। उसमें लिखा था कि उसकी सात महीने की गर्भवती पत्नी का गर्भपात हो गया।  यह संजोग तो निश्चित ही नहीं था इस बात का यकीन अल्फ को हो गया।

बाद में सन १९६६ में उन्हें शिरडी के साईबाबा और उसके बाद साईबाबा का मैं अवतार हूँ ऐसा कहनेवाले सत्यसाईबाबा के बारे में समझा।  तब उन्हें अपना व्यवसाय बेचना था।  मर्फेट के अनुसार साईबाबा ने उससे कह कि में तुझे एक अच्छा गि-हाईक खोजकर देता हूँ जो अच्छी रकम देगा और यह भी पूछा कि वह जादूगर याद है के नहीं? उस वक्त मैनें ही तुम्हारी सहायता की थी।  इसपर से साईबाबा जादूटोना जादूटोना मानते थे और उसमें फंसे लोगों को मदद भी करते थे यह बात स्पष्ट हो जाती है।

टाइडमन – जोहेन्सन की पत्नी का गर्भपात हुआ। यह कैसी साईबाबा की सहायता? नॉर्वे में ऑस्लो शहर में एक ‘साई सेंटर’ है। वहाँ के साई आश्रम में उसे जो सदस्य मिला था उसे टाइडमन जोहेन्सन ने कहा था कि साईबाबा ने उसे बहुत ठगाया है और वह तो एक भोंदू बाबा, एक झूठा आदमी है। सन् १९८४ साल के पहले ही उन्होंने साईबाबा से पीछा छुड़ा लिया है। ओस्लो के केंद्र में स्थित लोग उसकी बातोंपर भरोसा करने के लिए तैयार नहीं थे। उन्होंने टाइडमन को ही झूठा ठहराकर उसको बहिष्कृत किया। उसीने साईबाबा को एक हेलिकॉप्टर भोट दिया था। इसी  हेलिकॉप्टर में बैठकर साईबाबा अपने जन्म दिवस पर सभामंडप में आये थे। मगर बाद में साईबाबा को बद़नाम करनेवाले किताब लिखने का काम उसने शूरु किया। मगर बहुत बड़ी यह किताब प्रकाशित हो ही नहीं सकी।

हॅवर्ड मफेट ने ‘साईबाबा अवतार – अ न्यू जर्नी इन टू पॉवर अँड ग्लोरी’ इस लेख में साईबाबा के बारे में कई तर्क प्रस्तुत किये हैं। एक स्थान पर वे कहते हैं किसीने जादूटोना करने के कारण बाबा के पाँव एक जमाने में ढिले पड गये होंगे। यह भी लिखा है कि युवा अमेरिकन लड़के को किसी योगी पुरुष ने बतलाया कि वह सम्मोहन शक्ति के सहारे किसीके भी मन पर कब्जा करके उससे कुछ भी करा सकता है। बहुत – सा समय मिलने पर उस योगी के दुश्मन का खून भी उस लड़के से करा सकते है। इस शक्ति का उपयोग महिलाओं को वश में करने के लिए भी उसने किया है। आश्रम के कई लोगों को इस बात का पता है कि साईबाबा को मार डालने के लिए इस तरह की शिक्षा किसी युवा को दी जा रही है। उसपर कड़ी नज़र भी रखते हैं। जादूटोना करनेवाले इस योगी की पोल खोलनेवाले साईबाबा का वह योगी अत्याधिक द्वेष करता था।

इस किताब के ‘द लॉईस लेग्ज’ इस अध्याय में मर्फी एकदम इस निष्कर्ष पर पहुँचते है कि योगीनेही जादूगरी साईबाबा के पाँव ढिले कर दिये होंगे। (अफवाह है कि वह योगी याने रजनीश आगे चलकर महिलाओं को वश में करनेवाले भगवान ओशो बन गये।) साईबाबा जो कुछु भी बोलते थे मर्फी अंधा बनकर सबकुछ सही मानता था। साईबाबा के वचनों के बारें में उनके मन में कभी भी संदेह पैदा नहीं हुआ। ऐसे भी लिखते है कि साईबाबा न उनके बांये हाथ को लकवा हुआ था तब शिवरात्री के समय स्वंय उपचार करके उसे ठीक करने की ठानी। बाबा एक उमदा अभिनेता थे। लकवे का सोंग करना उनके लिए मुश्किल नहीं था। उनके भक्त उनके समीप जाकर सचमुच लकवा हुआ है क्या यह थोडे ही देखनेवाले थे और यह सब ढोंग होने की संभावना भी भक्तों के मन में नहीं आयी।

उनके और एक शिष्य ने उनकी किशोरवस्था के बारे में लिखी हुई बात देखिए — एक दैत्य (किसी महिला के भीतर प्रवेश कर चुका था) बहुत पक्का था। वह मारपीट आदि से हटता  नहीं था। दूर से वह स्वामीजी को देखता और उनके  प्रति परम दयालु बनकर उस दैत्य को गालियाँ देते रहता। वह राक्षस बहुत हठी था। निरंतर चिल्ला चिल्ला कर स्वमीजी को गालियाँ देते रहता था। स्वामीजी सुनकर थक जाते थे। फिर स्वामीजी उस राक्षसी महिला के बाल पकड़कर गोल गोल घुमाते और चेंडू की तरह दूर फेंक देते थे। उसका तन किसी दिवार से टकराकर फिरसे उलटा आकर स्वामीजी के चरणों में आ गिरता। इतना ताकतवर शरीर स्वामीजी कैसे उठा सकते थे?  ज्यों भगवान कृष्ण ने अपनी एक उंगलीपर गोर्वधन पर्वत उठाया था त्योंही स्वामीजी उस देह को उठाते थे। हम सब उनकी ओर क टकटकी बांधे देखते रहते। उनका शरीर पसीने से भीग गया था। आँखे लाल हो चुकी थी और वे भयानक दिखाई दे रहे थे। फिरसे उसके बालों को पकड़कर वो गरजे – अब तुम जाओगी या नही? तुमने सबकुछ सीख लिया है ना। हाँ। अब और मत मारीये मुझे। मैं चली जाती हूँ। फिरसे नहीं आऊंगी। ऐसा कहते हुए वह राक्षसी नारी कपकपाते हुए भाग गई उसके माथेपर से स्वामीजी ने कुछ बाल खींच कर निकाल लिए थे। उन बालों के नीचे प्रचंड कडक कांटा था। स्वामीजी ने उस दैत्य नारी के पति को बुलाकर काटा बतलाया और उसे धीमी आवाज़ में कुछ कहा और स्त्री को अंदर ले जाया गया। स्वामीजी हाँप रहे थे उनका चेहरा अभी भी भयानक दिख रहा था। हम उनकी और एक कोने से देख रहे थे तब उन्होंने हमारी ओर देखकर स्मित किया। बस्स। हम सबने उन्हें घेर लिया। इसी बीच स्त्री का पती बाहर आया। स्वामीजी ने उसे कहा – यह सिर्फ भूतबाधा नहीं है। उसपर किसीने जादूटोना किया है। उसकी बुध्दि को बिगाडने के लिए किसी तांत्रिक को बुलाकर कई तरह की पूजाएँ, मंत-तंत्र करके उस पर कब्जा कर लिया है। मगर अब धोका टल गया है। अब किसी बात का डर नहीं है। पति महोदय रोते रोते स्वामीजी के चरणों में गिर पड़े। बाद में स्वामीजीन एक तावीज़ बनाया उसमें उस स्त्री के बाल डाले और वह ताव़ीज उस स्त्री के गले में बांध दिया। उनसे पूछा गया कि क्या सचमुच दैत्य अब भी है? तब उन्होंने जवाब दिया – हाँ। जो लोग आत्महत्या करते हैं, दुर्घटना में मरते हैं या जिन्हें समय से पहले मौत आती है। जो निडर और मजबूत होते हैं उनके पास दैत्य नहीं जा पाते मगर जो डरपोक और ढिले होते हैं उन्हे इस स्त्री के समान वो बेजार करते हैं। कभी कभी पहली पत्नी के निधन के बाद पति दुसरी शादी करता है। पहली पत्नी के इच्छांएँ अतृप्त रहने के कारण वह दुसरी पत्नी को इस प्रकार से तकलीफ देती हैं। कभी कभी बड़ी जायदाद का सवाल होता है तब उस जायदाद के वारिस को मांत्रिकों के द्वारा पागल बना देते है। ऐसे कई कारण हो सकते हैं। इस तरह दैत्यक निकाल फेंकने में स्वामीजी को एक साल लगा।  इसके बाद तो वे केवल तीर्थप्रसाद, विभूति आदि देकर भूतों को भगाने लगे।

(श्रीमती विजयाकुमारी के ‘अन्यथा शरणं नास्तिक’)

चेन्नई – १९९९, इस किताब से।

डायने बस्किन के (स्वप्रतिष्ठा और साईस्तुति करनेवाले) ‘डिव्हाईन मेमरीज ऑफ सत्यसाईबाबा’ (पृ। १०८-११०) इस किताब में भी पाँव लूले पड़ने की घटना लिखी गयी है। उसमें सत्यसाईबाबा कई फोटे भी हैं। बस्किनजी लिखते हैं – “हमारे नौकर ने कहाँ की स्वामीजी पर विशप्रयोग होने की अफवाह फैल गई है।  मगर इस संदर्भ में स्वामीजी ने जो स्पष्टिकरण दिया, वह कई भई प्रकाशित नहीं हुआ। स्वामीजी ने गहा था कि बहुत शक्तिशाली योगी उनकी परिक्षा ले रहे थे। स्वामीजी सचमुच में अवतार हैं या नही इस बात की सच्चाई वे जानना चाहते थे पलभर में किसी आदमी की जान ले सकती हैं ऐसी ताकतवर बिजली के स्त्त्रोत्र वे लोग स्वामीजी पर छ़ोड रहे थे। स्वामीजी वे सब उन्हीं पर वापस पलटाना नहीं चाहते थे। यदि ऐसा किया तो वे सभी मर गये होते। इसलिए सभई इलेक्ट्रिक करंट को स्वामीजी ने स्वंय झेला। अंत में ने योगी जाग उठे और स्वामीजी की शरण में आये उनके शिष्य बन गये। और उसके बाद हफ्ते भर में भर में स्वामीजी अपने को जो लकवा मार गया था उसे फेंक दिया।”

ऐसी अतिशयोक्ति भरी प्रशंसा करते समय वह स्त्री और अधिक अफवांहे और किस्से कहानियाँ पेश करती हैं। स्वामीजी के सभी भक्तों के वर्णनों में ऐसेही पलभर में आदमी को जला देनेवाले स्पिरिच्युअल हाय व्होल्टेज और स्वामीजी की दैवी शक्ती की कसौटी लेनेवाले और ताकतवर दुश्मन कई योगी होते हैं। मगर ये योगी कभी भी पडदे के बाहर नहीं आते। इसलिए ये लोग कौन हैं इस बात का पता नहीं चलता। खुदका स्वास्थ्य खुद ही संभालनेवाले स्वामीजी स्वयंही हिपजॉंईंटवाला पेशंट ठीक नहीं कर पाये। आये दिन बुढ़ापे के कारण जो विकृतियाँ दिखाई देने लगी है वह बात छुपाने के लिए आश्रमवासियों को बहुत कोशिश करनी पड़ती है।

और एक साई चरित्र है। जिसमें साई की प्रशंसा की गई है। सन् १९५५ में लिखी एम। एन। लीली की किताब ‘लोकनाथ साई’ है। किताबपर हस्ताक्षर करके साईबाबाने अपनी पंसदी दर्शायी है। इस किताब में जादूटोनेसके बारे में अंधश्रध्दाओं को बढ़ानेवाली अनेक कहानियाँ हमें पढ़ने की लिए मिलती है।

उदाहरण के लिए

स्वामीजी ने मेरी मां को और अन्य लोगों को अलग अलग बुलाकर कहा की मेरे पिताजी पर किसीने जबरदस्त जादू की है। उस शुक्रवार को मेरे पिताजी बेलीफ को लेकेर हमारे गिंडी गाँव गये। वहाँपर उन्होंने शेड बनायी थी वह निकालकर फेंक जी। वहाँ की जमीन खोदकर वहाँपर जो टूटेफूटे बर्तन, मूर्गी और बकरी की हड्डीयाँ आदि सबकुछ फेंक दिया। अब मेरे पिताजी पूरी तरह से ठीक हो गये हैं। मगर स जादूगर की तो उन्हें पागल बनाकर जिंदा मारने की कोशिश थी।

यहाँ दी हुई  पूरी जानकारी साईबाबा की अनुमति से उनके हस्ताक्षर से और उन्हीं के प्रेस में तैयार की गई है। जादूटोना के शिकार अपने भक्तोंको मदद करने के बहाने वे उन्हें अपने कब्जे में रखते थे। किसीके मन में कोई संदेह उत्पन्न हो रहा हो तो उन्हें बाबा की सुरक्षा नहीं मिलेगी। ऐसे थे गुरू! बाबा की आज्ञापालन न करके के परिणाम बहुत भयानक होंगें ऐसा डर सबके मन में था। ऐसे डर में बाबा की ताकत थी। उनके प्यार में नहीं।

इंडियन विचहंट यह नॅशनल जिओग्रॅफिक का अनुबाधपट भारत के पिछडे इलाके में अब भी डायन समझकर स्त्रियों को मार डाला जाता है। झारखंड में स्थित राची शहर ऐसे कामों का पिहर माना जाता है। युरोप में १७ वी और १८ वी सदी में ४०,००० सित्रियों को डायन समझकर जिंदा जला दिया ऐसा इतिहास में लिखा मिलता है। अंतिम डायन सालेम मेसेच्युसेट्स में १९६२ में जलाया गया।

झारखंड में सन १९९६ पांच सौ डायनो को संदेह की वजह से मारा गया। उसके बाद इसके विरोध में इस प्रांत में कानून बनाया गया और इससे सन २००० तक चारसौ आदमियों को पकड़ा गया। ‘विचक्रॅफ्ट इन वेस्टर्न इंडिया’ इस किताब की लेखिका और पत्रकार सोहैला कपूर ने नॅशनल जिओग्रॅफिक टिव्ही चॅनेल के लिए एक धमाकेदार समाचार का पिछा किया जिओग्रॅफिक गुरूदास मंडी नामक १६ साल के बच्चे ने अपनी बुआ का सिर काटकर उसे पुलिस स्टेशन ले गया। बुआ जानवरों को लेकर जंगल में घास चराने गयी थी। उसे मार डालने का कारण था। गुरूदास के भाई को बुखार आया और एकही दिन में वह ठीक हो गया। ३ साल पहले उसके पिताजी गुजर गये थे और अब इनके बड़े भाई ऐसीही बीमारी के कारण अस्पताल में हैं। अपनी डायन बुआ को मार डालने से भाई ठीक होगा इसी उम्मीद से उसने बुआ का सिर काट डाला। उसकी यह मैना बुआ उसे माँ की ममता से बहुत सालों से संभाल रही थी। गुरूदास के इस कार्य की सभी ने निंदा की और अब वह झारखंड के घटशीला जेल में बंद है।

सात सालो में झारखंड में ऐसी सात घटनाएँ घटी। डायन महीलाएँ अक्सर विधवाएँ होती हैं। उन्हें मार डालने में घर से बाहर निकालने में या जायदाद में अधिकार पाने के लिए उनके कोई रिश्तेदार अपनी स्वार्थपूर्ती करना चाहते हैं। प्रार्थना करने से दूरी पर स्थित व्यक्ति ठीक हो सकती है और जादूटोना करने से वह बीमाऱ पड़ सकती है या मर सकती है। ऐसी बातें  जादूटोना करनेवाले लोग भोली भाली जनता के मन में ठूँस देते हैं। बाबा रमाशंकर ऐसे ही एक तांत्रिक गुरू थे। आप तामफिलिजा की काली माता के भक्त है। नॅशनल जॉग्रेफिकने इस गुरू का और उनकी तिन महीला शिष्यों का उनके कारनामों के साथ चित्रिकरण किया है। सिद्धी प्राप्त करने हेतु जिंदा मुर्गी की गर्दन को कटने के एक कर्मकांड भी था। किसी को मार डालने के लिए सांप-बिच्छू का इस्तेमाल भी वे करते थे। गूरू का ऐसा दावा था कि उनके मंत्रतंत्रो से दुसरों के मन में प्रेम, द्वेष या गड़बड़ी पैदा की जा सकती है।

गुरूदास मंडी के बारे में सोहैला कपूर ने जो खोज की उससे पता चला की उनका बड़ा भाई अस्पताल में टी। बी। पर इलाज करने से ठीक हो गया। उसके पिता क्षयरोग से पीड़ित थे। उन्हीं की वजह से दोनों भाईयों को क्षयरोग हुआ था गुरूदास के परिवार ने जिस मांत्रिक की सलाह ली थी उस मात्रिक का सौहेला ने चित्रीकरण किया था। सीने मैना पर गाँव के मंदिर में आरोप किया था और नतीजा भी सुनाया था। यह फोटोग्राफी जारी थी तब जिसकी माँ डायन है ऐसा आरोप जिस युवक पर हुआ था वह भयभीत युवक सौहेला की शरण में आया।  यह आरोप भी वही मांत्रिक कर रहा था। किसी बड़े जमींदार की लड़की बीमार पड़ी। उसपर दवा असर नहीं कर रही थी। अत: उसे मांत्रिक के पास ले गये। मगर टिव्ही, कॅमेरा सबके द्वारा तसवीरे खींची जा रही थी अत: उस मांत्रिक की हिमंत ही नही हुई कि इस लड़की का नाम लें। गांववालों ने उस औरत का पक्ष लिया फिर मांत्रिक ने चालाखी से एक पेड़ की ओर इशारा किया वह पेड़ दो हफ्ते में खतम हो जाएगा ऐसा भविष्य भी सुनाया। कई हफ्ते में खतम हो जाएगा ऐसा भविष्य भी सुनाया। कई हफ्ते बीत जाने के बाद भी पेड़ को कुछ नहीं हुआ।

जिन स्त्रियों को डायन करार दिया जाता है उन्हें तो पुलीस की ओर से सुरक्षालेनी ही पड़ती है। ऐसी स्त्रियों पर गांव के लोग बहिष्कार डालते हैं। उन्हें अपना घर परिवार, जमीन जायदाद सबकुछ छोड़ना पड़ता है या फिर उनके घर को जला दिया जाता है। उनकी जो मुलाकातें ली गई थी उसमें यह सब कुछ स्पष्ट दिखाई देता है। झारखंड पुलिस इंनस्पेक्टर मिश्रा जी ने गुरूदाल को पकड़ लिया था। इन सब बातों के लिए वे अज्ञान, आरोग्य कि शिक्षा का अभाव और दवादारू की कमतरता इन बातों को दोषी ठहराते हैं। ऐसी परिस्थिती में निराश और लाचार हुए लोग मांत्रिकों की शरण में जाते हैं और जिस डायन पर संशय हो उसे खत्म कराते हैं